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Albert Einstein Ke Aavishkar Or Unke Ansune Tathya




Hello Friends , 😊😊😊


                                        दोस्तों आज हम उनकी बात यहाँ करेंगे जो कि 20 वी सदी के पहले 20 वर्षों तक विज्ञान जगत में विश्वपटल पर छाए रहे ,

जी हाँ दोस्तों हम बात कर रहे है The Great Scientist Albert Einstein की ,

दोस्तो ये वही वैज्ञानिक है जो अपनी सादगी के लिये मशहूर थे , और लोगों की भीड़ से बचने के लिये ये उन्हें कहते थे ,


" क्षमा कीजिये मै वो नही हु जिसे आप लोग समझ रहे है "

Albert Einstein Ke Aavishkar Or Unke Ansune Tathya
Albert Einstein Ke Aavishkar Or Unke Ansune Tathya

Albert Einstein Khoj Inventions And Unknown Facts 2018


अल्बर्ट का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी में एक यहूदी परिवार में हुआ था ,

दोस्तों बचपन से ही आइन्स्टाइन को ये बातें सताती रहती थी कि पृथ्वी , अंतरिक्ष और भी दूसरी बाते जो काम कैसे करती है ,
वो उन सबको जानने के इच्छुक होते थे ,

परन्तु दोस्तो वो शुरू से इतने बुद्धिमान नहीं थे , और उनका सर बचपन मे सामान्य बच्चों से थोड़ा बड़ा था , वो ज्यादा बोल भी नही पाते थे ,

इसी कारण वो चार साल तक कुछ नही बोल पाए थे , उनके माता - पिता के कानों में अपने बच्चे के पहले शब्द थे कि " सुप बहुत गर्म है " , आइन्स्टाइन ने ये पहले शब्द शाम को खाने के वक़्त कहे ,

ये सुनकर उनके माता - पिता काफी खुश हुए ।

दोस्तो अल्बर्ट जब स्कूल जाते थे तो भी उन्हें वहां अच्छा नही लगता था , इसलिए वो अपने अध्यापकों से कुछ ना कुछ पूछते रहते थे उनकी जिज्ञासा के कारण ,

क्योकि उस वक़्त उन्हें किताबो द्वारा रटाया जाता था ,जो उन्हें पसंद नही था ,

और जब वो प्रश्न पूछते तो उन्हें मन्द बुद्धि समझा जाता था , एक बार उन्होंने एक टीचर से पूछ ही लिया कि दिमाग को कैसे विकसित किया जाये ,

तो जो लाइन उनके टीचर ने कही वो आइन्स्टाइन के लिये मूल मन्त्र साबित हुई , उनके टीचर ने कहा था


         " अभ्यास ही सफलता का मूल मन्त्र है "


दोस्तों इसी बात को अल्बर्ट ने अपने जीवन का हिस्सा मान लिया और वो मेहनत करने लग गए , और इसका सकारात्मक परिणाम भी निकला ,

आगे जाकर उन्होंने गणित जैसे विषय को चुना ,
          
E = mc Square का सिद्धांत आइन्स्टाइन द्वारा ही दिया गया है ,

1921 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया ,
दोस्तो अल्बर्ट इतने जीनियस थे कि वो अपनी समीकरण को पहले ही दिमाग मे पूरा हल कर लेते थे , और जब उसे लैब में जाकर अप्लाई करते तो वो बिल्कुल सटीक बैठती थी ,

आप सोच सकते है कि कोई भी व्यक्ति कोई नई समीकरण बनाता है तो कई पेज भर देता है , लेकिन अल्बर्ट उसे दिमाग मे ही सॉल्व कर देते थे ।

इसीलिए Friends 14 मार्च को पूरी दुनिया उन्हें याद करने के लिये जीनियस डे मनाती है ।।

दोस्तों कुछ निजी कारणों से अल्बर्ट को जर्मनी छोड़कर अमेरिका आना पड़ा था ,

और उन्हें यहाँ कई विश्व विद्यालयो में पढ़ाने के लिये आमंत्रित किया गया , परन्तु उन्होंने प्रिंस्टन विश्व विद्यालय को चुना ,
दोस्तो जब आइन्स्टाइन प्रिंस्टन पहुंचे तो वहाँ के एक अधिकारी ने उनसे कहा कि , मिस्टर अल्बर्ट आप हमे अपने अनुसार आपके लैब के लिए जरूरती सामान की लिस्ट दे दीजिए ,

हम आपको वो सब पहुंचा देंगे , लेकिन दोस्तो आप आइन्स्टाइन की सादगी देखिए , उन्होंने अधिकारी को कहा कि आप मुझे एक ब्लैकबोर्ड और कुछ चॉक व एक टोकरी ला दीजियेगा बस ,

अधिकारी ने चोंक कर पूछा कि टोकरी किस बात के लिये , तो अल्बर्ट ने कहा कि मै गलतियां बहुत करता हूं , इसलिए टोकरी कागजो से भर जाएगी , इसलिए आप मुझे बस ये चीजें लाकर दे दीजियेगा ।

दोस्तो इतने जीनियस होने के बावजूद अल्बर्ट कुछ बाते भूल ही जाया करते थे ,

उदाहरण के तौर पर मै आपको एक किस्सा उनके जीवन से जुड़ा सुना देता हूँ --

                               दोस्तों एक बार की बात है , आइन्स्टाइन उनके प्रिंस्टन कॉलेज से अपने घर टेक्सी से जा रहे थे , तो वो उनके घर का एड्रेस ही भूल गए ,

और फिर उन्होंने टेक्सी वाले से पूछा कि क्या तुम अल्बर्ट आइन्स्टाइन का घर जानते हो ,

तब टेक्सी वाले ने कहा की सर मेने उन्हें कभी देखा तो नही है पर फिर भी वो इतने फेमस है कि मै उनका घर जानता हूँ ,

तब आइन्स्टाइन ने कहा कि मै ही आइन्स्टाइन हु , और घर का पता भूल गया हूँ , कृपया आप मुझे घर छोड़ दीजिए ,
टेक्सी वाले ने उन्हें उनके घर छोड़ा और अल्बर्ट के काफी जोर देने पर भी टेक्सी वाले ने उनसे पैसे नही लिए ,


दोस्तो एक और किस्सा मैं अल्बर्ट का आपको सुनाना चाहता हूँ , ::--
           एक बार अल्बर्ट ट्रेन से कहीं जाने के लिये सफर कर रहे थे , 

Albert Einstein Ke Aavishkar Or Unke Ansune Tathya
Albert Einstein Ke Aavishkar Or Unke Ansune Tathya

Albert Einstein Khoj Inventions And Unknown Facts 2018



जब वो ट्रेन में बैठे थे , तब टिकट चेकर ने आकर उनसे टिकट मांगा , तो वो अपनी जेबे संभालने लगे , जब उन्हें टिकट नही मिला तो उन्होंने अपनी सूटकेस को चेक किया , 

पर दोस्तों टिकट वहाँ पर भी नहीं था , तो वो झुककर टिकट संभालने लग गए ,

क्योकि टिकट चेकर उन्हें अच्छी तरह से पहचानता था , तो उसने उनसे कहा कि सर आप परेशान मत होइए , आपने टिकट लिया जरूर होगा , परन्तु वो कही खो गया है , 

आप रहने दीजिए सर आपसे टिकट नही मांगा जाएगा , और यह कहकर वो आगे बढ़ गया , परन्तु कुछ देर बाद उसने देखा कि सर आइन्स्टाइन अभी भी अपना टिकट उसी फिक्र के साथ सम्भाल रहे है ,

तो ये देख टिकट चेकर फिर उनके पास गया और कहा कि सर आप परेशान मत होइए आपसे टिकट नही मांगा जा रहा ,

इस बात पर आइन्स्टाइन ने कहा कि मैं इसलिए परेशान हु की अगर मुझे टिकट नही मिला तो मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे जाना कहाँ है ,

दोस्तो अल्बर्ट सादगी भरा जीवन जीने में विश्वास करते थे ,


दोस्तो 18 अप्रेल 1955 को 76 साल की उम्र में अमेरिका के न्यू जर्सी शहर में उनकी मृत्यु हो गई ,

दोस्तो आइन्स्टाइन ने अपने जीवन मे कई शोध के लेख भी प्रकाशित किये थे ,

दोस्तो आज विज्ञान में ऐसी कई खोजे है जिन पर हम काम करते है और हमारी उपयोगी वस्तुओ में वो आती है ,
वो कही ना कहि अल्बर्ट की हमे देन है ...


दोस्तो उनकी मृत्यु के बाद थॉमस हार्वे नामक डॉक्टर ने रिसर्च के लिये शव परीक्षण के दौरान उनके परिवार की अनुमति के बिना ही उनका मस्तिष्क निकाल लिया था , 

जो कि बहुत ही गलत और पाप करने लायक काम था ,

उसके बाद उनके दिमाग को 20 साल तक एक जार में रखा गया , और फिर आइन्स्टाइन के पुत्र की अनुमति के बाद 1975 में उनके दिमाग को 240 भागो में बांटकर कई वैज्ञानिकों को शोध के लिये दिया गया ,

ओर शोध के परिणामस्वरूप ये बात सामने आई , की सामान्य व्यक्ति के दिमाग के मुकाबले आइन्स्टाइन के दिमाग मे सेल्स की संख्या ज्यादा थी ।।


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