World Famous

Bharat Ke Vaigyanik Jo World Famous Nahi Ho Paye , Kyo ?


स्वागत है दोस्तो , 🙏
                                
                              दोस्तो उन्हें प्रसिद्धि मिलनी चाहिए थी, जिसके की वो हकदार थे , आखिर ऐसे वो कौनसे भारतीय  वैज्ञानिक थे , जिन्होंने कई वर्षों पहले ऐसे आविष्कार कर दिए थे ,

जिन्हें दुनिया उन आविष्कारों को बाहर के वैज्ञानिकों के द्वारा किया हुआ मानती है ,

अरे बाहर की बात छोड़ो भाई , हम भारतीय ये तक नही जानते कि जो आविष्कार हमारे यहाँ हो चुके है , वो उसे दूसरे देशों से हुआ मानते है ,

तो दोस्तो कोई बात नही , जरूरी नही की सब लोग सब जानते ही हो ,

पर आज हम आपको बताएंगे कि वे असाधारण व्यक्ति कौन थे जिन्होंने ये आविष्कार या खोज इतने वर्षों पहले ही कर दी थी ,


दोस्तो , सबसे पहले हम बात करते है विमानों की यानी    

उड़ने वाले जहाज ::--

1.

दोस्तो आपने और हम सभी ने बचपन से एक ही बात पढ़ी और जानी है कि उड़ने वाले विमान या हवाई जहाज को सबसे पहले Right Brother's ने बनाया था ,पर ये बात सही नही है , 

Bharat Ke Vaigyanik Jo World Famous Nahi Ho Paye , Kyo ?
Bharat Ke Vaigyanik Jo World Famous Nahi Ho Paye , Kyo ?


क्योंकि दोस्तो हजारों वर्षों पहले ऋषि भारद्वाज ने विमान की खोज कर ली थी , ओर उसके प्रमाण हम आपको बताते है ,

दोस्तो ऋषि भारद्वाज ने अपने विमानशास्त्र में विस्तारपूर्वक इस बात को बताया है कि विमान किस तरह से बनाकर उसे हवा में उड़ाया जाता है , 

उसमे " गोदा " नामक एक विमान का जिक्र है जो कि उड़ने के साथ - साथ अदृश्य भी हो सकता था , 

और किसी भी जगह जाकर चालक द्वारा तबाही मचा सकता था ,

दोस्तो स्कंद पुराण में ऋषि कर्दम द्वारा उनकी पत्नी के लिये बनाये गए एक विमान के बारे में बताया गया है , जो कि कहि भी , किसी भी जगह , आ और जा सकता था ।

दोस्तो रामायण में पुष्पक विमान की जानकारी तो हम सभी को है , परन्तु क्या आपको पता है की रावण के पास इसके अलावा भी कई और विमान भी थे ,

जी हाँ दोस्तो , 
श्रीलंका की रामायण रिसर्च कमेटी द्वारा उन हवाई अड्डों के अवशेषों को भी खोज निकाला गया है जो कि उस वक़्त रावण के विमानों के लिए प्रयोग में लिए जाते थे ।

दोस्तो इस बात को कोई नकार ही नही सकता की हमने उड़ने वाले विमानों का आविष्कार हजारों साल पहले ही कर लिया था ,

और बात रही Rights Brother's की , तो उनसे 8 वर्षों पहले ही हमारे भारत के " शिवकर बापूजी तलपड़े " ने हवाई जहाज का निर्माण कर दिया था जिस पर एक फ़िल्म भी बॉलीवुड द्वारा बनाई गई है ,

दोस्तो शिवकर बापूजी ने उन्ही ऋषि भारद्वाज के विमान शास्त्र से सीखकर ये विमान बना दिया था , और मुंबई की चौपाटी पर इसका परीक्षण भी कर लिया था ,

कारण ::---- तो दोस्तो फिर ऐसा क्या कारण रहा कि हमारे इन ग्रेट साइंटिस्ट को प्रसिद्धि मिल नही पाई या दी नही गई , जी हाँ दोस्तो उन्हें पहचान दी ही नही गई , 

क्योकि आप भी जानते है 1896 के वक़्त हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम था , 


तो क्या ये अंग्रेज अधिकारी चाहते होंगे की कोई भारतीय विश्व प्रसिद्ध हो जाये , वो नही चाहते थे कि ऐसा हो ।


2.
दूसरा आविष्कार ::--- Plastic Surgery (प्लास्टिक सर्जरी ) ::--- 

दोस्तो आज प्लास्टिक सर्जरी का मेडिकल साइंस में कितना बड़ा योगदान है ,
और कितना कुछ इसके द्वारा आज किया जा सकता है , यहाँ तक कि किसी भी व्यक्ति का रूप परिवर्तन तक आप इससे कर सकते है ,

लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नही है ये प्लास्टिक सर्जरी , 

परन्तु क्या आप जानते हो कि ये प्लास्टिक सर्जरी और ऐसे कई ऑपरेशन हमारे ऋषि सुश्रुत द्वारा 3000 साल पहले ही ये सफलतायें अर्जित कर ली गई थी ,

जी हाँ दोस्तो महर्षि सुश्रुत द्वारा शल्यक्रिया को सफलतापूर्वक किया जा चुका है , और उस वक़्त युद्ध मे घायल सैनिकों को उनके अंग कटने या त्वचा के फट जाने पर ऋषि सुश्रुत के पास ही ले जाया जाता , 

ओर इतना ही नहीं ऋषि सुश्रुत द्वारा कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण भी किया जाता था ,

पथरी , प्रसव , मोतियाबिंद और प्लास्टिक सर्जरी जैसी और भी कई रोगों की चिकित्सा को सफलतापूर्वक उस वक़्त कर लिया गया था ।।


3.
बिजली का अविष्कार ::--

                                 दोस्तो जैसा कि आप सभी को पता है कि बिजली का आविष्कार  " थॉमस अल्वा एडिसन " ने किया लेकिन जब आपको एडिसन द्वारा बताई गई सत्य बात मैं बताऊंगा तो आप चौक जाओगे ,
 दोस्तो जिस सुबह एडिसन को बिजली बनाने का आइडिया आया ,
उससे पिछली रात , यानी बीती रात को वो एक संस्कृत का श्लोक पढ़ रहे थे जिसमें बिजली बनाने के गूढ़ रहस्य को समझाया गया था , 

और वो पढ़ते - पढ़ते एडिसन की आँख लग गई , और नींद में उन्हें सपना आया , और उस सपने में ही वो उस श्लोक के असली रहस्य को समझ पाए , 

दोस्तो  इस श्लोक में लिखा था , एक मिट्टी का बर्तन लेवे और उसमें कॉपर शीट डाले , कोपरसल्फेट डाले और भी जिंक और बाते एक सूत्र द्वारा समझाई गई है और बाद में तारो को मिला दे , 

Bharat Ke Vaigyanik Jo World Famous Nahi Ho Paye , Kyo ?
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इस तरह बिजली का निर्माण होगा ।

दोस्तो इस श्लोक से एडिसन को काफी सहायता मिली , और क्या आपको पता है दोस्तो ये श्लोक महर्षि अगस्त्य द्वारा उनके ग्रंथ अगस्त्य संहिता में लिखा गया ,

ये वही महर्षि अगस्त्य मुनि है जो सप्तऋषियों में अपना एक स्थान रखते है ।


4.
रेडियो का आविष्कार ::---- 
                               
                                  दोस्तो ये एक ऐसा आविष्कार है जो सीधा - सीधा नकल मारकर किया गया , दोस्तो जनरल नॉलेज की किसी किताब को उठाकर देखलो , वहाँ आपको रेडीयो का आविष्कारक जी. मार्कोनी को बताया गया है , जो कि सरासर गलत है ,

क्योकि जब हमारा भारत ब्रिटीशियस का गुलाम था ,उस वक़्त ये मार्कोनी ने हमारे वैज्ञानिक श्री जगदीश चन्द्र बसु की रेड डायरी में से कुछ नोटेड पॉइंट्स देखे ,

जिनको देखकर मार्कोनी ने रेडियो का आविष्कार किया।

मार्कोनी को 1909 में वायरलैस टेलीग्राफ के लिये नोबेल पुरस्कार मिला , जबकि इसका पहला प्रदर्शन जो कि रेडियो तरंगों की मिली मीटर तरंगे थी , का प्रदर्शन जगदीश चंद्र बसु ने 1895 में ही कर दिया ,

और ये मार्कोनी उसके 2 साल बाद प्रदर्शन करके सारा श्रेय ले गया ,

कारण सीधा था दोस्तो , की भारत गुलाम था उस वक़्त और अंग्रेज किसी कीमत पर भी किसी भारतीय को विश्व प्रसिद्ध होता नही देख सकते थे ,

दोस्तो मार्कोनी ने इसे फटाफट पेटेन्ट भी करा लिया था ,
पर ये सीधा श्री जगदीश के साथ धोखा ही था ,

आज के मोबाइल उसी रेडियो क्रांति का नतीजा है ।।


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