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Thomas Alva Adison Ka Jivan or Unke Aavishkar


Hello Friends , 🤗🤗


                                    दोस्तो मै आज आपको एक ऐसे व्यक्ति से परिचित करवाऊंगा जिन्होंने मानव इतिहास की सोच को पलट कर रख दिया , 

जी हाँ फ्रेंड्स मैं बात कर रहा हु थॉमस अल्वा एडिसन की ,

दोस्तो दूसरे महान वैज्ञानिको की तरह इन्हें भी इनके बचपन मे मन्द बुद्धि समझा गया , जो कि लोगों की भूल थी ,

दोस्तो मैं आज आपको थॉमस के बारे में उनके जीवन से जुड़ी वो बातें बताऊंगा जो कि आपको भी एक प्रेरणा के रूप मिलेगी ,

और आप चाहे तो उसे अपने जीवन को सफल बनाने में प्रयोग कर सकते है ,

Thomas Alva Adison Ka Jivan or Unke Aavishkar
Thomas Alva Adison Ka Jivan or Unke Aavishkar


जीवन परिचय -- ☺ ---
                             एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1847 को अमेरिका में हुआ , एडिसन इनके माता-पिता की सात सन्तानो में सबसे छोटे थे ,

थोड़े बड़े होने पर उन्हें एक स्कूल में एडमिशन करवाया गया ,
जहाँ से उनकी काफी शिकायते आने लगी , क्योकि वो अपने टीचर्स से बहुत सवाल पूछते थे , और टीचर इस बात को उनकी मस्ती - मजाक समझ लेते थे ,

परन्तु एडिसन रियल में हर बात को जानना चाहते थे , पर टीचर्स के पास उनके सवालों का कोई जवाब नही होता था ,
दोस्तो उनकी शिकायतों का आना इतना बढ़ गया कि एक दिन उनके स्कूल से लेटर उनके साथ भेजा गया , और कहा कि ये अपने घरवालों को दे देना ,

क्योकि थॉमस अभी बच्चे ही थे तो वे उस लेटर को पढ़ नही सकते थे , इसलिये वो उसे अपनी माँ के पास ले गए और उन्हें देते हुए कहा कि माँ ये लेटर स्कूल वालो ने दिया है ,

जब लेटर को एडिसन की माँ द्वारा खोला गया , तो उसे पढ़कर माँ रोने लगी ,

माँ को रोता देख एडिसन ने पूछा कि आप ऐसे क्यो रो रहे हो , आखिर ऐसा इस लेटर में क्या लिखा है ,

तब उनकी माँ ने जो कहा वो सुनकर दोस्तो आप भी चोंक जाएंगे ,

उन्होंने कहा कि स्कूल वालो ने लिखा है कि , आपका बेटा बहुत ही होशियार है और वो काफी समझदार भी है , लेकिन हमारी स्कूल में इतने अच्छे टीचर्स नही है , जो कि एडिसन जैसे होनहार को पढ़ा सकें ,

इसलिए आप अपने बच्चे को खुद ही शिक्षा दीजिए ,

माँ के द्वारा पढ़े गए इस लेटर से एडिसन काफी खुश हुए ओर वो घर पर ही उनके माँ द्वारा एक विज्ञान की पुस्तक पढ़ने लग गए , 

क्योकि उस पुस्तक में अलग अलग प्रयोग के बारे में लिखा था तो थॉमस उसे करने लगे , परन्तु उसके लिये उन्हें एक लैब की जरूरत थी जो उन्होंने घर पर ही बना ली , पर किसी कारण से माँ ने नाराज होकर उनके वो लैब के सामान को घर से बाहर फेंक दिया ,

अब एडिसन पैसे वाले तो थे नही जो और सामान लेकर आ जाते , पर लैब के लिये पैसो की जरूरत थी , तो उन्होंने ट्रेन में अखबार और टिकट बेचना शुरू कर दिया ,

और कुछ पैसे जमा करके वही एक खाली पड़े रेल के डिब्बे में लैब स्थापित की , दिनभर काम करना और रात को लैब में काम करना ,

परन्तु कहते है ना दोस्तो सफलता परीक्षा लेती है , ऐसा ही कुछ हुआ एडिसन के साथ , एक दिन उस ट्रेन के डिब्बे में कुछ प्रयोग करते हुए उनसे कुछ केमिकल नीचे गिर गया , जिससे कि उस डिब्बे में आग लग गई ,


वहाँ आस पास से सुरक्षाकर्मियों ने आकर उस आग को बुझा दिया , परन्तु एक सुरक्षा कर्मी ने एडिसन को जोरदार थप्पड़ मार दिया ,

और उस मार के परिणामस्वरूप उन्हें एक कान से कम सुनाई देने लगा ,

दोस्तो बात यही से आती है हमे समझने की , यदि हम या कोई और भी व्यक्ति एडिसन की जगह होता तो वो गुस्सा हो जाता ओर प्रयास करना छोड़ देता ,

क्योकि सीधी सी बात है दोस्तो , आप खुद सोच कर देखिये की आप के पास पैसा नही है , घर की आर्थिक स्थिति बदतर है , और आपको आपके हिसाब से प्रयोग भी करने है ,

परन्तु बाधाएं आपका पीछा नही छोड़ रही , ऐसे में क्या करेंगे आप ,

दोस्तो पता है एडिसन ने क्या किया उन्होंने खुद को ही कहा कि अच्छा हुआ जो मैं ऊँचा सुनता हु , इस कारण कम से कम में नकारात्मक लोगो की बातें तो नही सुन पाउँगा , जो कि मेरे लिये अच्छी बात है ,

दोस्तो एडिसन फिर से मेहनत ने जुट गए और एडिसन ने एक आविष्कार किया , उन्होंने एडिसन यूनिवर्सल स्टॉक प्रिन्टर को बनाया , और वो उसे बेचने में भी सफल रहे ,

दोस्तो जब धीरे - धीरे वो एक बड़े वैज्ञानिक बन गए और उन्हें लगा कि उनके आविष्कार लगभग 3000 अमेरिकी डॉलर में बिक जाएंगे , 

तभी उन्हें एक खुशी का झटका लगने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा , जब उन्हें पता चला कि उनके एक आविष्कार को 40000 अमेरिकी डॉलर में खरीद लिया गया है ,

दोस्तो कितनी बड़ी बात थी उनके लिये क्योकि उस टाइम के वो डॉलर आज के 7 या 8 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर थे ,
दोस्तों 21 अक्टूबर 1879 को एडिसन ने वो कर दिखाया जिसके लिये हम लोग शाम होते ही उन्हें याद करते है ,
जी हाँ दोस्तो थॉमस ने इलेक्ट्रिक बल्ब का आविष्कार किया ,
दोस्तो क्या आपको पता है कि सर एडिसन बल्ब का आविष्कार करते हुए 10000 बार असफल हुए थे , और जब उनसे इस असफलता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं असफल नही हुआ हूं ,

बल्कि मुझे तो अब पता चला है कि ऐसे 10000 कोनसे तरीके है जिनसे सीखकर मेने इस आविष्कार को कर दिखाया है ,

दोस्तो ये होती है सकारात्मक सोच की पराकाष्ठा , 

दोस्तो क्या आपको पता है कि वो पहला बल्ब उस दिन पूरे दिन भर जला था और लोग दूर - दूर से इसे देखने आए थे , क्योकि किसी के लिए भी ये एक चमत्कार से कम नहीं था ।


दोस्तो एडिसन अब एक महान वैज्ञानिक बन चुके थे और एक दिन थोड़े खाली समय मे वो अपनी कुछ पुरानी चीजों को टटोल रहे थे उन्हें देख रहे थे ,

Thomas Alva Adison Ka Jivan or Unke Aavishkar
Thomas Alva Adison Ka Jivan or Unke Aavishkar


तभी उनकी नजर एक कागज पर पड़ी , और उन्हें याद आया कि ये वही लेटर था जो बचपन मे उन्हें स्कूल वालो ने दिया और जिसे माँ ने पढ़कर उन्हें सुनाया था ,

अनायास ही एडिसन ने उस लेटर को खोलकर पढ़ना शुरू कर दिया ,

पर , अरे , ये क्या , एडिसन की आँखों मे तो आँसू थे और उनकी आंखों में आँसू इसलिए थे क्योंकि उस लेटर में जो असलियत में स्कूल वालो ने लिखा था वो ये था की आपका बच्चा मानसिक तौर पर ठीक नही है और आगे से उसे स्कूल में पढ़ने ना भेजा जाए ,

दोस्तो इस बात को पढ़कर मानो एडिसन के पैरों तले जमीन खिसक गई हो , एडिसन ने रोते हुए कहा कि एक मेन्टल बच्चे को उसकी होनहार माँ ने आज इतना बड़ा वैज्ञानिक और सफल इन्सान बना दिया ,

दोस्तो आपको बता दु की एडिसन की माँ का देहांत काफी समय पहले ही हो चुका था , 

पर अब आप भी ये बात जान गए होंगे कि सकारात्मक होने का ये गुण एडिसन को उनकी माँ से ही मिला था , क्योंकि देखा जाए तो एडिसन सिर्फ उनकी माँ की बदौलत ही एक महान व्यक्ति बन पाए ,

दोस्तो आप खुद सोचिये की अगर उस दिन एडिसन की माँ उन्हें स्कूल वालो की उस चिठ्ठी की सच्चाई बता देती तो क्या आज हमें बल्ब का उजाला मिल पाता ,

दोस्तो 18 अक्टूबर 1931 को एडिसन ने अपनी अंतिम सांस ली , और उनके सम्मान में पूरे दिन अमेरिका की लाइट्स को बंद रखा गया ,

दोस्तो हमेशा अपनी सोच को सकारात्मक रखिये और जब भी आप निराश हो जाये तो ऐसी ही किसी महान व्यक्ति के संघर्ष मय जीवन को पढ़ लीजिये , 


मैं दावे के साथ कह सकता हूँ दोस्तो , की आपको आपकी परेशानियां छोटी लगने लगेगी ।।


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